छत्तीसगढ़

अरपा और अन्य नदियों के संरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई

Shantanu Roy
10 Nov 2025 11:30 PM IST
अरपा और अन्य नदियों के संरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई
x
छग
Bilaspur. बिलासपुर। अरपा नदी के संवर्धन और उसके उद्गम स्थल के संरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई में कोर्ट ने कोरबा और गौरेला पेंड्रा मरवाही (जीपीएम) जिले के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपनी-अपनी जिलों में लीलागर, सोन और टिपान नदियों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करें। इस आदेश में अरपा नदी के साथ ही प्रदेश की सात अन्य प्रमुख नदियों — महानदी, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो और शिवनाथ — को भी शामिल किया गया है। सुनवाई के दौरान जल संसाधन विभाग, रायपुर ने अपना पर्सनल एफिडेविट कोर्ट में फाइल किया। शपथपत्र में विभाग ने बताया कि प्रत्येक जिले में संबंधित कलेक्टर की
अध्यक्षता
में विशेष समितियां बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान करना और उनके पुनरुद्धार के लिए सुझाव देना है। शपथपत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि समितियों और उप-समितियों को समय-समय पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल संसाधन सचिव ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि विभाग सभी निर्देशों का पालन करेगा और नदियों के संरक्षण तथा पुनरुद्धार के कार्य को अक्षरशः लागू किया जाएगा।
बिलासपुर नगर निगम की तैयारी
बिलासपुर नगर निगम आयुक्त ने भी निजी शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि अरपा नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में चिल्हाटी और दोमुहानी में 17 एमएलडी और 25.79 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज प्लांट काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 में पचरी घाट पर 1 एमएलडी क्षमता वाला नया एसटीपी चालू हो गया है और कोनी में 6 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी जल्द ही चालू किया जाएगा। नगर निगम ने शेष अपशिष्ट जल के उपचार के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है और इसकी फिजिबिलिटी जांच के लिए समिति गठित की गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश
कोर्ट ने सुनवाई के बाद जल संसाधन सचिव को निर्देश दिया कि वे एक विस्तृत पर्सनल शपथपत्र फाइल करें, जिसमें यह स्पष्ट हो कि मुख्य नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़ा प्रस्ताव पहली बार कब शुरू किया गया। साथ ही अब तक उठाए गए कदम, वर्तमान स्थिति और इसे पूर्ण रूप से लागू करने के लिए अपेक्षित समय सीमा भी स्पष्ट रूप से बताई जाए। कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को भी निर्देश दिए कि वे एक पर्सनल एफिडेविट प्रस्तुत करें जिसमें सीवरेज प्लांट के इंस्टॉलेशन और कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति, अरपा नदी में अनुपचारित या मिलावटी पानी छोड़ने से रोकने के लिए उठाए गए कदम और पिछले निर्देशों के पालन की पूरी जानकारी दी जाए।
कोर्ट ने सभी एफिडेविट अगली सुनवाई की तारीख से पहले फाइल करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2025 को होगी, जिसमें नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस सुनवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि हाईकोर्ट नदियों के संरक्षण को गंभीरता से ले रहा है और राज्य प्रशासन एवं नगर निगम से अपेक्षा है कि वे अपने दायित्वों का पालन कर नदी संरक्षण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।
Next Story